मत पुकारो
मुझे ना पहचानो
जाति ,धर्म से
इन्सान हूँ मै
बस जानो मुझे कर्म से
खून मेरा भी तुम जैसा लाल है
फिर क्यूँ मै अछूत रहा जन्म से
मै भी तुम जैसा है मेरा भी रूप तुम सा
फिर क्यों गया पहचाना मुझे सिर्फ मेरे जन्म से
धर्म के ठेकेदारों ने वंचित रखा मुझको ज्ञान से
रखा दूर मुझको मेरी ही पहचान से
पलते रहे वो मेरे ही खून पर
और जीर्ण शीर्ण कर मुझे खेलते रहे मेरे मर्म से
मै खड़ी दहलीज पर और वो ऊँचाई चढ़ गए
मेरा हक मार कर बलवान देखो बन गए
अब तो होश में आओ अधर्मियों ,या फिर ड़ूब मरो शर्म से source poonam Dahiya
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