| Tanaji Kamble | 1:01am Apr 29 |
अभिजित गणेश भिवा मै इतिहासकार नहीं हूँ, ओर्कियोलोगी भी नहीं हूँ मै सामान्य कार्यकर्ता हूँ, समझो मै आपसे हार गया तो बताव, आपको आज के तारीख का वर्तमान का क्या आकलन है, देश के ९० करोड़ लोग भुकमरी के कगार पर क्यों और कैसे पहुँच गए गए, उनको किसने वहां तक घसीट कर लेके गये. बाबासाहब को ७ करोड़ लोग सपोर्ट कर रहे थे, ओ आज इसी वक्त ७० करोड़ होना चाहिए थे. लेकिन ओ दो करोड़ भी नहीं है ऐसा क्यों? आनेवाले १० साल में बाबासाहब के सपोर्टर जीरो (शुन्य) नहीं होंगे इसकी आप गारंटी, हमी दे सकते हो, क्या कोई भी माँ बाप पहले अपने बच्चे का सोचते है, बाद में दुसरे का मै सामान्य आदमी हूँ तो जाहिर है मै पहले अपने बच्चे का सोचूंगा इसलिए मै मेरे ९० करोड़ लोगो का पहले सोचूंगा इनको तकलीफ होगी तो हमारी जान चली जाएगी मतलब नस्ल बर्बाद हो जाएगी. आप असामान्य हो इसलिए आप बुद्ध का ज्ञान ब्राहमणों में बाटो और उनका सोचो मै इतना नहीं कर सकता, आप के नजरिये से अगर मै गलत काम कर रहा हूँ तो मै गलत हूँ और आगे आगे बताते जाव क्योंकि संत तुकाराम महाराज ने कहा था की "निन्दकाचे घर असावे शेजारी" मतलब टिका और गलती निकालने वाले का घर हमारे घर के बाजू में होना चाहिए. अगर आप को मै सही लग रहा हूँ तो मै सही काम कर रहा हूँ. राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी का आन्दोलन इंग्रज के विरोध में नहीं था सावित्रीमाई और फुलेजी दोनोही इंग्रज को माउली मतलब माँ बाप कहते थे.
इंग्रजी माउली, इंगर्जी वैखरी, शूद्रांना उद्धरी, मनोभावे |
इंग्रजी माउली नाही मोघलाई नाही पेशवाई, मुर्खशाही |
इंग्रजी माउली देई सत्व्ज्ञान , शूद्राला जीवन देई प्रेम |
इंग्रजी माउली, शूद्रांना पान्हा पाजी संगोपन आजी करतेस |
इंग्रजी माउली, तोडते पशुत्व,देई मानुशात्व, शुद्र्लोका |
इंग्रजी शिकुनी जातीभेद मोड, भटजी भारुड फेकुनिया |
अगर ओ इंग्रज यहाँ नहीं आते तो हम सब लोगो को शिक्षा, सम्पति, शस्त्र या कोनसे भी हक्क, अधिकार नहीं मिलते. या जोतीराव फुले, राजश्री शाहू महाराज, बाबासाहब, आन्ना भाऊ साठे और हम सब पैदा ही नहीं होते अगर होते तो गुलामो के सिवा दुसरे कोई भी नहीं होते. ग्यारहवी सदी में १२०० मुघल सैनिक आये थे और बाबर ने अपने वंशाजाके नाम वसीयत में नसीयत लिखी है और कहाँ है "भारत पर राज करना है, तो ब्राहमणों को साथ और सहयोग लेके करो राज करो" वरना ये देश छोडके आपको जान पड़ेगा. इसलिए मुघलो की सलतन में ४० % हिस्सेदारी ब्राहमणों की थी और ६५० साल तक दोनों मिलके इस देश पर राज कर रहे थे, मनुस्मुर्ती में उसका पक्का बंदोबस्त कर के रखा था, इसलिए बाबासाहब को उसको जलन पड़ा. ये बात पहले राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी को मालुम पड़ी इसलिए उन्होंने हमें लिखित आदेश दिया की जब तक अंग्रेज यहाँ है, तब तक हम सब लोगो को संधि है, अवसर है, की हम सब मिलके अंग्रेजो की मदत से शिक्षा लेले वरना ये ब्राहमण लोग हमको उनके गुलामी से आझाद नहीं होने देंगे जल्दी करो इसलिए उन्होंने पहली लड़कियोकी स्कुल खोल दिया उनमे से मातंग जात १४ साल की बच्ची ने जाहिर आव्हान ब्राहमणों को स्त्री पुरुष तुलना नामके निबध लेख में जो सवाल खड़े किये ओ आज तक किसी ब्राहमण ने उसके उत्तर नहीं दिए. राष्ट्रपिता जोतीराव फुले अंग्रेजो की मदत से ब्राहमणों के खिलाप आझादी का आन्दोलन चला रहे थे और वही आन्दोलन से बाबासाहब ने अपने हात में लेके हक्क और अधिकार लिए ओ हक्क अधिकार पुना पक्ट द्वारा ब्राहमणों ने दुबारा छीन लेलिये इसलिये बाबासाहाब ने कहाँ "पारतंत्र्यात जिनकी हमें बाते सहन नहीं होती उनके हमें आझादी के बाद लाता (पैरो से कुचलना) खाना पड़ेगी और हमारा संघर्ष सत्ता और सम्पति के लिए नहीं बल्कि पूरी आझादी के लिए है". १६ अगस्त १९४७ को नकली आझादी के दुसरे ही दिन पूरी बारिश में आझाद मैदान मुंबई में आन्ना भाऊ साठे ने राली (मोर्चा) निकलकर कहाँ "ये आझादी झूठी है देश की जनता भूकी है" और आज वही ९० करोड़ लोगोका हाल है उनका दिन का उत्पन्न २० रुपये के निचे लाया गया है इसलिए हम लोगोने आझादी की जंग छेड़ी है, उसमे आपको आना है तो आपक स्वागत है नहीं आना तो जावो ब्राहमणों की चाटते रहो हमें कुछ इससे लेना देना नहीं और ये आझादी कि जंग हम भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा लढ़ रहे, आप सब का हम इंतजार कर रहे है
इंग्रजी माउली, इंगर्जी वैखरी, शूद्रांना उद्धरी, मनोभावे |
इंग्रजी माउली नाही मोघलाई नाही पेशवाई, मुर्खशाही |
इंग्रजी माउली देई सत्व्ज्ञान , शूद्राला जीवन देई प्रेम |
इंग्रजी माउली, शूद्रांना पान्हा पाजी संगोपन आजी करतेस |
इंग्रजी माउली, तोडते पशुत्व,देई मानुशात्व, शुद्र्लोका |
इंग्रजी शिकुनी जातीभेद मोड, भटजी भारुड फेकुनिया |
अगर ओ इंग्रज यहाँ नहीं आते तो हम सब लोगो को शिक्षा, सम्पति, शस्त्र या कोनसे भी हक्क, अधिकार नहीं मिलते. या जोतीराव फुले, राजश्री शाहू महाराज, बाबासाहब, आन्ना भाऊ साठे और हम सब पैदा ही नहीं होते अगर होते तो गुलामो के सिवा दुसरे कोई भी नहीं होते. ग्यारहवी सदी में १२०० मुघल सैनिक आये थे और बाबर ने अपने वंशाजाके नाम वसीयत में नसीयत लिखी है और कहाँ है "भारत पर राज करना है, तो ब्राहमणों को साथ और सहयोग लेके करो राज करो" वरना ये देश छोडके आपको जान पड़ेगा. इसलिए मुघलो की सलतन में ४० % हिस्सेदारी ब्राहमणों की थी और ६५० साल तक दोनों मिलके इस देश पर राज कर रहे थे, मनुस्मुर्ती में उसका पक्का बंदोबस्त कर के रखा था, इसलिए बाबासाहब को उसको जलन पड़ा. ये बात पहले राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी को मालुम पड़ी इसलिए उन्होंने हमें लिखित आदेश दिया की जब तक अंग्रेज यहाँ है, तब तक हम सब लोगो को संधि है, अवसर है, की हम सब मिलके अंग्रेजो की मदत से शिक्षा लेले वरना ये ब्राहमण लोग हमको उनके गुलामी से आझाद नहीं होने देंगे जल्दी करो इसलिए उन्होंने पहली लड़कियोकी स्कुल खोल दिया उनमे से मातंग जात १४ साल की बच्ची ने जाहिर आव्हान ब्राहमणों को स्त्री पुरुष तुलना नामके निबध लेख में जो सवाल खड़े किये ओ आज तक किसी ब्राहमण ने उसके उत्तर नहीं दिए. राष्ट्रपिता जोतीराव फुले अंग्रेजो की मदत से ब्राहमणों के खिलाप आझादी का आन्दोलन चला रहे थे और वही आन्दोलन से बाबासाहब ने अपने हात में लेके हक्क और अधिकार लिए ओ हक्क अधिकार पुना पक्ट द्वारा ब्राहमणों ने दुबारा छीन लेलिये इसलिये बाबासाहाब ने कहाँ "पारतंत्र्यात जिनकी हमें बाते सहन नहीं होती उनके हमें आझादी के बाद लाता (पैरो से कुचलना) खाना पड़ेगी और हमारा संघर्ष सत्ता और सम्पति के लिए नहीं बल्कि पूरी आझादी के लिए है". १६ अगस्त १९४७ को नकली आझादी के दुसरे ही दिन पूरी बारिश में आझाद मैदान मुंबई में आन्ना भाऊ साठे ने राली (मोर्चा) निकलकर कहाँ "ये आझादी झूठी है देश की जनता भूकी है" और आज वही ९० करोड़ लोगोका हाल है उनका दिन का उत्पन्न २० रुपये के निचे लाया गया है इसलिए हम लोगोने आझादी की जंग छेड़ी है, उसमे आपको आना है तो आपक स्वागत है नहीं आना तो जावो ब्राहमणों की चाटते रहो हमें कुछ इससे लेना देना नहीं और ये आझादी कि जंग हम भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा लढ़ रहे, आप सब का हम इंतजार कर रहे है