संजय सोनावणे, RSS के सभी संघचालक से भी आप बहुत सब गुण संपन हो. हेडगेवार, सुदर्शन, गोलवरकर गुरूजी से भी हुशार हो. ओ गधे थे, इसलिए उनके लोगोको इकट्टा कर रहे थे. उनको कुछ भी बुद्धि नहीं थी, इसलिए उनके लोगो का आन्दोलन चला रहे, इसलिए वाजपेयी प्रधानमंत्री बना. तुम भी रस्ते पर उतर जा तेरा बेटा प्रधान मंत्री नहीं तो बाबासाहब के आगे जायेगा धन्यवाद आभार आपके बुद्धि को.
कोण किसीको विरोध कर रहा है हमें हमारी पड़ी है, दूसरो क्यों देखे हमें हमारी आझादी चाहिये, जाके दुबारा राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी को पढ़ लेना, राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी नि १८४८ को जो आझादी का आन्दोलन चलाया था. फुलेजिने १८५७ के लढाई को भट पांडे का युद्ध कहाँ था. रानडे ने राष्ट्रपिता जोतीराव फुले को अंग्रेजोके विरोध में भड़काने कोशिश की, लेकिन फुलेजी उनके आन्दोलन में सामिल नहीं हुए बल्कि उन्होंने हम लोगोको आदेश दिया था की "जब तक अंग्रेज यहाँ है तब तक शिक्षा लेलो नहीं तो अंग्रेज चले जायेंगे तो ये ब्राहमण लोग हम लोगोको उनकी गुलामी से आझाद नहीं होने देंगे" इसका मतलब हम लोग गुलाम थे. तो हम कब ब्राहमणों की गुलामी से आझाद हुए ये किधर लिखा है, अगर हम ब्राहमणों की गुलामी से आझाद हुए इतनी बड़ी घटना उत्सव जैसी मनानी चाहिए तो ये घटना कब और कहाँ हुई, ये बताव इसका मतलब हम लोग ब्राहमणों की गुलामी से आझाद नहीं हुए १६ आगस्त १९४७ पूरी बारिश में मुंबई में नकली आझादी के दुसरे दिन आन्ना भाऊ साठेजीने ही मोर्चा हजारो लोगो के साथ आझाद मैदान में निकाला था और जाहिर कहाँ था "ये आझादी झूठी है देश की जनता भूकी है" इसका मतलब हम आझाद नहीं हुए थे
बाबासाहब ने कहाँ था पारतंत्र्यात जिनकी हमें बाते सहन नहीं होगी उनकी हमें आझादी के बाद लाता (पैरो से कुचलना ) खाना पड़ेगी और हमारा संघर्ष सत्ता और संपत्ति के लिए नहीं बल्कि पूरी आझादी के लिए है. बाबासाहब के कहने का मतलब आझाद नहीं हुए हमें आझादी का आन्दोलन चलाना पड़ेगा
इसका मतलब हम लोग ब्राहमणों का द्वेष करने के लिए नहीं हमारी आझादी के लिए लढ़ रहे है
१ चलवल का मतलब ब्राहमण द्वेश ये आप जैसे महामूर्ख ही जाने
२ मराठा का अर्थ तो जानते हो क्या
३ ब्राहमणों के गधे ने लिखा हुवा इतिहास पढ़के खुद को ज्यादा शहाणा मत बनो क्योंकि सिधु संस्क्रती और बुद्ध धम्म के ९०% ग्रंथ जलाके राख कर दिए गए अभी जो भी बाकि है उनके सपोर्ट या उनके भलेके ही ग्रन्थ है भांडारकर और भारत इतिहास संशोधन मंडल ये हमारा इतिहास जलाने और उनका इतिहास लोगो को बताने के लिए संस्था पैदा की गई है इसलिए सिर्फ हमें बुद्ध का तर्कशास्त्र वापर कर के हमें हमारा सही इतिहास तैयार करना है
४ तेर ..... ने कभी संशोधन किया था क्या महार, मराठा, अलुतेदार, बलुतेदार... ६००० जाती में जो विभाजित हुवा मूलनिवासी ओ सब इक है. लोगो में नाम, आडनावे (सरनेम) उनकी कुल देव देवता लोक प्रथा रुढी, पूजा पद्धति सन, उत्सव का सार निकालो तो पता चला जायेगा. आपके हिसाब से शिवाजी महाराज मनुस्मुर्ती मान रहे थे तो क्यों कृष्णा भास्कर कुलकर्णी को कैसे काटा, तलवार कैसी चलाई, राज कैसे स्थापित किया. मोरोपंत पिंगले ने मुह पर शिवाजी महाराज को कहा था तुम शुद्र हो तुम्हारी कोई भी आज्ञा हम नही माननेवाले क्योंकी उस समय वर्नास्राम का ज्यादा जोर चला रहा था क्योंकी मुघलो के राज्य मे प्रशासन मे ब्रह्मणो कि हिस्सेदारी ४० % थी उसको नष्ट करणा हैं तो राजा बनना जरुरी था इसलिये दो बार शिवाजी महाराज ने राज्याभिषेक किया था
५ छोटा नागपूर पठार ओर बडे नागपूर मे सिर्फ महार हि लोग नही रहते थे सब जाती के मूलनिवासी लोग रहते थे नाग नदी किनारे सब जाती के सब लोग रहते थे इसका मतलब ब्राहामान छोडके सभी लोग नागवंशीय थे इसका सबूत नाग लोग शस्त्र के पूजक थे ओर महार, रामोशी, मांग,कुणबी ... बारा बलुतेदार अपनी अपनी शस्त्र के पूजक थे, दुसरा नाग सर्फ कि पूजा सब मूलनिवासी करते थे इसका मतलब हम सब एक हैं
ब्रह्मणो ने मनुस्मुर्ती के द्वारा हममे क्रमिक असमानता निर्माण करके द्वेष भावना निर्माण करके डरा धमाकाकर कालाप्निक ग्रंथो द्वारा गुलाम बनाया जिसने शस्त्र निचे डाले मतलब शरण गए ओ शुद्र और जो शरण नहीं गए आज तक खुद को नागवंशीय कहते थे और छत्रपति शिवाजी महाराज के वन्शजोने शस्त्र नहीं डाले थे उनके वंशज शस्त्र चला रहे थे ने इसका मतलब ओ खुद को नाग वंशीय मानते थे और शरण गए थे उनको ब्राहमण की गुलामी से आझाद करना चाहते थे ओ एकदम जल्दी होनेवाला नहीं था इसका सबुत संभाजी महाराज का उम्र के १४ साल में ही लिखा हुवा बुद्ध भूषण ग्रन्थ तो ओ किसको मानते थे ओ नाम से ही पता चलता था संत तुकाराम मौर्या घराने से तालुक रखते थे इसका मतलब यहाँ का सब मूलनिवासी सम्राट अशोक के काल में बुद्ध धर्मीय था इसका ही अर्थ है हम सब मूलनिवासी नागवंशीय थे और है इसके लिए किसी ब्रहमनोने लिखी हुई किताब या किसी दलाल भड़वे की जरुरत नहीं चाहिये
हमें हमारी आझादी चाहिये और हमारा संघर्ष पूरी आझादी के लिए है और रहेगा
कोण किसीको विरोध कर रहा है हमें हमारी पड़ी है, दूसरो क्यों देखे हमें हमारी आझादी चाहिये, जाके दुबारा राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी को पढ़ लेना, राष्ट्रपिता जोतीराव फुलेजी नि १८४८ को जो आझादी का आन्दोलन चलाया था. फुलेजिने १८५७ के लढाई को भट पांडे का युद्ध कहाँ था. रानडे ने राष्ट्रपिता जोतीराव फुले को अंग्रेजोके विरोध में भड़काने कोशिश की, लेकिन फुलेजी उनके आन्दोलन में सामिल नहीं हुए बल्कि उन्होंने हम लोगोको आदेश दिया था की "जब तक अंग्रेज यहाँ है तब तक शिक्षा लेलो नहीं तो अंग्रेज चले जायेंगे तो ये ब्राहमण लोग हम लोगोको उनकी गुलामी से आझाद नहीं होने देंगे" इसका मतलब हम लोग गुलाम थे. तो हम कब ब्राहमणों की गुलामी से आझाद हुए ये किधर लिखा है, अगर हम ब्राहमणों की गुलामी से आझाद हुए इतनी बड़ी घटना उत्सव जैसी मनानी चाहिए तो ये घटना कब और कहाँ हुई, ये बताव इसका मतलब हम लोग ब्राहमणों की गुलामी से आझाद नहीं हुए १६ आगस्त १९४७ पूरी बारिश में मुंबई में नकली आझादी के दुसरे दिन आन्ना भाऊ साठेजीने ही मोर्चा हजारो लोगो के साथ आझाद मैदान में निकाला था और जाहिर कहाँ था "ये आझादी झूठी है देश की जनता भूकी है" इसका मतलब हम आझाद नहीं हुए थे
बाबासाहब ने कहाँ था पारतंत्र्यात जिनकी हमें बाते सहन नहीं होगी उनकी हमें आझादी के बाद लाता (पैरो से कुचलना ) खाना पड़ेगी और हमारा संघर्ष सत्ता और संपत्ति के लिए नहीं बल्कि पूरी आझादी के लिए है. बाबासाहब के कहने का मतलब आझाद नहीं हुए हमें आझादी का आन्दोलन चलाना पड़ेगा
इसका मतलब हम लोग ब्राहमणों का द्वेष करने के लिए नहीं हमारी आझादी के लिए लढ़ रहे है
१ चलवल का मतलब ब्राहमण द्वेश ये आप जैसे महामूर्ख ही जाने
२ मराठा का अर्थ तो जानते हो क्या
३ ब्राहमणों के गधे ने लिखा हुवा इतिहास पढ़के खुद को ज्यादा शहाणा मत बनो क्योंकि सिधु संस्क्रती और बुद्ध धम्म के ९०% ग्रंथ जलाके राख कर दिए गए अभी जो भी बाकि है उनके सपोर्ट या उनके भलेके ही ग्रन्थ है भांडारकर और भारत इतिहास संशोधन मंडल ये हमारा इतिहास जलाने और उनका इतिहास लोगो को बताने के लिए संस्था पैदा की गई है इसलिए सिर्फ हमें बुद्ध का तर्कशास्त्र वापर कर के हमें हमारा सही इतिहास तैयार करना है
४ तेर ..... ने कभी संशोधन किया था क्या महार, मराठा, अलुतेदार, बलुतेदार... ६००० जाती में जो विभाजित हुवा मूलनिवासी ओ सब इक है. लोगो में नाम, आडनावे (सरनेम) उनकी कुल देव देवता लोक प्रथा रुढी, पूजा पद्धति सन, उत्सव का सार निकालो तो पता चला जायेगा. आपके हिसाब से शिवाजी महाराज मनुस्मुर्ती मान रहे थे तो क्यों कृष्णा भास्कर कुलकर्णी को कैसे काटा, तलवार कैसी चलाई, राज कैसे स्थापित किया. मोरोपंत पिंगले ने मुह पर शिवाजी महाराज को कहा था तुम शुद्र हो तुम्हारी कोई भी आज्ञा हम नही माननेवाले क्योंकी उस समय वर्नास्राम का ज्यादा जोर चला रहा था क्योंकी मुघलो के राज्य मे प्रशासन मे ब्रह्मणो कि हिस्सेदारी ४० % थी उसको नष्ट करणा हैं तो राजा बनना जरुरी था इसलिये दो बार शिवाजी महाराज ने राज्याभिषेक किया था
५ छोटा नागपूर पठार ओर बडे नागपूर मे सिर्फ महार हि लोग नही रहते थे सब जाती के मूलनिवासी लोग रहते थे नाग नदी किनारे सब जाती के सब लोग रहते थे इसका मतलब ब्राहामान छोडके सभी लोग नागवंशीय थे इसका सबूत नाग लोग शस्त्र के पूजक थे ओर महार, रामोशी, मांग,कुणबी ... बारा बलुतेदार अपनी अपनी शस्त्र के पूजक थे, दुसरा नाग सर्फ कि पूजा सब मूलनिवासी करते थे इसका मतलब हम सब एक हैं
ब्रह्मणो ने मनुस्मुर्ती के द्वारा हममे क्रमिक असमानता निर्माण करके द्वेष भावना निर्माण करके डरा धमाकाकर कालाप्निक ग्रंथो द्वारा गुलाम बनाया जिसने शस्त्र निचे डाले मतलब शरण गए ओ शुद्र और जो शरण नहीं गए आज तक खुद को नागवंशीय कहते थे और छत्रपति शिवाजी महाराज के वन्शजोने शस्त्र नहीं डाले थे उनके वंशज शस्त्र चला रहे थे ने इसका मतलब ओ खुद को नाग वंशीय मानते थे और शरण गए थे उनको ब्राहमण की गुलामी से आझाद करना चाहते थे ओ एकदम जल्दी होनेवाला नहीं था इसका सबुत संभाजी महाराज का उम्र के १४ साल में ही लिखा हुवा बुद्ध भूषण ग्रन्थ तो ओ किसको मानते थे ओ नाम से ही पता चलता था संत तुकाराम मौर्या घराने से तालुक रखते थे इसका मतलब यहाँ का सब मूलनिवासी सम्राट अशोक के काल में बुद्ध धर्मीय था इसका ही अर्थ है हम सब मूलनिवासी नागवंशीय थे और है इसके लिए किसी ब्रहमनोने लिखी हुई किताब या किसी दलाल भड़वे की जरुरत नहीं चाहिये
हमें हमारी आझादी चाहिये और हमारा संघर्ष पूरी आझादी के लिए है और रहेगा
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